रेखा शाह आरबी:-

कुछ लोगों को रोने के लिए कोई न कोई मुद्दा चाहिए । ऐसे लोगों को मुद्दा हो तो ठीक है ना हो तो उसे जबरदस्ती पैदा करने में भी महारत हासिल होती है । चतुरी जी ऐसे ही व्यक्तित्व वाले व्यक्ति हैं। भले ही महीने में एक बार इन्हें कहीं की यात्रा करनी हो । लेकिन पेट्रोल का रोना रोज ऐसे  रोते हैं जैसे इनकी सारी गाढ़ी कमाई पेट्रोल खरीदने में ही जा रही है।  तो कभी सब्जी ,दाल, चावल इन सभी के भाव को लेकर बिलखने लगते हैं । और अपने साथ दो-चार और लोगों को भी रुला कर रख देते हैं। व्यर्थ में दिन रात हाय तौबा मचा कर रखते हैं। कि देश में बहुत महंगाई  है बहुत महंगाई  है । पर कायदे से देखा जाए तो महंगाई के असीम फायदे हैं। अगर सब को मिलाकर एक ग्रंथ लिखा जाए तो लिखने वाला लेखन का ऑस्कर तो लेकर ही आएगा यह बात पक्की है।  और उसे चर्चा भी जगत में मिलेंगा वह तो अलग से मिलेगा । महंगाई का मुद्दा उठाने वालों को सरकार को देशद्रोही घोषित कर देना चाहिए । यह जनता का भला देख ही नहीं सकते हैं।  और अपनी महंगाई के विरोध में पीपड़ी बजाते रहते हैं। और सबको कंफ्यूज करते रहते हैं।  कभी नहीं सोचते हैं कि महंगाई हमारे देश की शुभचिंतक है। महानुभावो को इस देश के स्वास्थ्य की बहुत ही चिंता रहती है। मंहगाई  देश के लोगों के शुगर ,कोलेस्ट्रॉल, हॉट, बीपी सबका ख्याल रखकर उन्हें स्वस्थ रखती है।
चतुरी जी को सलाह है कि थोड़ा सोच कर देखिए। सरकार कितना मेहनत करके खाद तेलों का दाम जनहित में बढ़ाती है । ताकि लोग कम खाएं और उनका कोलेस्ट्रॉल न बढ़ाने पाए। सरकार जनता का विरोध झेलकर पेट्रोल के दाम बढ़ाती है। ताकि अपने देश की आलसी जनता थोड़ा पैदल चलकर अपने शरीर का ख्याल रखें। अपने आप को फिट रखें। सरकार लोगों की आंखों में किरकिरी बनकर रेलवे का भाड़ा बढ़ाती है । ताकि आप बेमतलब अपने रिश्तेदारों को परेशान ना करें। इसी तरह अन्य चीजों का दाम बढ़ाने के पीछे भी सरकार की मंशा बिल्कुल पाक साफ़ रहती है। लेकिन देखने वाले इसे उल्टी नजर से देखते हैं । अब उनकी नजरों का क्या किया जाए । चतुरी जी जैसे लोगो को  अपनी नजरों का इलाज करवाना चाहिए।
देश के सारे अस्पताल भरे पड़े हुए हैं। सब उल्टा सीधा खाकर बीमार पड़े हुए हैं । अस्पतालों में लंबी-लंबी लाइन लगी हुई है । किसी को 6 महीने बाद का डेट मिलता है।  तो किसी को 2 महीने बाद का डेट मिलता है । आप इन अस्पतालों की स्थिति सोच सकते हैं।  लेकिन जनता इनके बारे में सोचना ही नहीं चाहती चतुरी जी की सोचना चाहिए कि कम लोग बीमार पड़ेंगे तो अस्पतालों में भीड़ भी तो कम रहेगी।  सरकार यही तो सारे उपाय कर रही है । थोड़ा साइकिल चला कर थोड़ा पैदल चलकर अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे तो बीमारी से भरे हुए अस्पतालों पर भीड़ तो नहीं रहेगी।  लेकिन इन्हें समझ में आए तब ना। अब सरकार हर एक को पकड़ कर तो समझने से रही कुछ लोगों को अपने आप भी समझ जाना चाहिए।
देश के शुभचिंतक रोज जनता को अनेक प्रकार से समझाते हैं कि से महंगाई इतनी बुरी नहीं है। इसकी घुट्टी पिलाते हैं पर चतुरी जी अपना ही आलाप को गाते रहते हैं । चतुरी जी नासमझ लोग हैं अपना रोना बंद नहीं करते हैं।  महंगाई का फायदा देखना है तो अपने पड़ोसी देश को देखिए । ना रोटी, ना वोटी ,ना पेट्रोल, जिसके कारण वातावरण स्वच्छ अनाज महंगा होने के वजह से जनता का पेट भी कम खाकर मस्त, ज्यादा खाने की वजह से शरीर के पाचन तंत्र को ज्यादा मेहनत करना पड़ता है। बस सरकार ने उसका बोझ कम कर दिया है। तो आपको भी सरकार पर संदेह नहीं करना  चाहिए। चतुरी जी को सलाह है कि आप कोई ऐसा टीचर अपने लिए रख लीजिए।  जो आपको ज्ञान की घुट्टी पिलाऐ की महंगाई इतनी भी बुरी चीज नहीं है। जितना आप समझते हैं। और अपनी बेसुरी पिपली बजा कर सरकार के कान में खुजली ना पैदा करें। और सरकार को चैन की नींद सोने दे और उसको अपनी चैन की बांसुरी बजाने दे। एक तो इस देश में मच्छर बहुत परेशान करते हैं और दूसरे चतुरी जी जैसे खटमल लोग बहुत परेशान करते हैं।
( लेखिका: बलिया, उत्तर प्रदेश से हैं )
फोटो साभार गूगल

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By lamppost

Dr. Brajesh Verma was born on February 26, 1958, in the Bhagalpur district of Bihar. He has been in the field of journalism since 1987. He has worked as a sub-editor in a Hindi daily, Navbharat Times, and as a senior reporter in Hindustan Times, Patna and Ranchi respectively. Dr. Verma has authored several books including Hindustan Times Ke Saath Mere Din, Pratham Bihari: Deep Narayan Singh (1875–1935), Rashtrawadi Musalman (1885–1934), Muslim Siyaasat, Rajmahal and novels like Humsaya, Bihar – 1911, Rajyashri, Nadira Begum – 1777, Sarkar Babu, Chandana, Gulrukh Begum – 1661, The Second Line of Defence and Bandh Gali.